Tuesday, December 11, 2018

मैथिली किस्सा – गोनू झा के भैयारी संग बंटवारा

मैथिली किस्सा : गोनू झा आ भोनू झा दुनु भाइमे झगड़ा भ गेल। मुदा एकटा महींस आ कम्मल बचि गेल जे बँटा नहि सकल। एहि पंचैतीसं गोनू झा बड़ दुखित रहैत छलाह।

Division Between Gonu Jha and Bhonu Jha (MaithiliSamachar)

मैथिली किस्सा : गोनू झा पर गामक लोक बड़ कन्हुआयल रहैत छलाह। हुनकर उन्नतिसं लोककेँ ईर्ष्या होइत छलनि। हुनका लोकनिक सम्मिलित प्रयाससं गोनू आ भोनू दुनु भाइमे झगड़ा भ गेल। मुदा एकटा महींस आ कम्मल बचि गेल जे बँटा नहि सकल। एहि पंचैतीसं गोनू बड़ दुखित रहैत छलाह।

महींसकें दिन भर खुअबैत – पोसैत छलाहआ दुध दुहैत छलाह भोनू। जाड़क मास रहबाक कारणे दिन भरि त कम्मल गोनुकें रहैत छलनि, मुदा राति क ओ भोनुक भ जाइत छलनि। गोनुकें हरलनि ने फुरलनि, किछु दिनक बादसं दिन भरि त कम्मलकें ओछान बना ओछब लगलाह मुदा साँझ होइतहि भिजा देथि।

तहिना महींसक जखन दुहबाक समय होइक, ओ ओकरा छौंकी ल क छौंकिआब लागैत छलाह। ऐसे भोनुकें लेनीक देनी पड़ी गेलनि। जखनहि ओ दुध दुह लेल बैसथि कि गोनू झा छौंकी ल क तैयार। तहिना हुनकर भाई रातिक भीजल रहने कम्मलक उपयोग नहि क पबैत छलाह।

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तमसायल भोनू पुनः पंचैती बैसओलनि। गोनू कते कहलथिन जे पंचक चक्कर मे नहि पड़ह, नहि त बिलटि जयबह। मुदा ओ माननिहार नहि। पंच सभ बैसलाह, मुदा गोनुक तर्कक सोझाँ सबहक मूहँ फक्क रही गेलनि। कारन पंचैतीक अनुसार ओ अपन समानकें कोना कोन रूपें उपयोग करताह
तकर हिदायत त नहि देल गेल रहैक। अन्तमे पंच सभ अपन मूहँ लेने बिदा भेलाह तथा गोनू झा भोनूकें पंच सभ चालिक मादे बुझा तथा ओकरा पटिया अपना दिस क लेलनि। ओ दुनु पुनः संगे रह लगलाह।

एक दिन गामक मुखिया राज दरबारमे पहुँचलाह तथा महींसक प्रशंसा करैत गोनुक राजाक प्रतिये घृणा-भावक बखान करय लगलाह। राजाक तुंरत फरमान बहरायल। चारि सिपाही गोनू झाक गाम दौड़ल। मुदा गोनू झा महींस देवासं साफ़ मुकरि गेलाह। सिपाही मुँह बिधुअओने घुरल। राजाकें पता लागिते आगि लेसि देलकनि। आ तुरत दोसर सिपाही आदेश देलनि जे एखनि दुटा कसाइकें पठा ओकर महींसकें बाधेमे मारि देल जाय।

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एहि आदेशक जखन गोनू झाकें भनक भेटलनि त सोझे दरबारमे पहुँचलाह – सरकार महींस हमर बड़ हडाहि अछि। एकरा मर बाबाइये देल जाय मुदा एकटा निवेदन जे ओकर खाल हमरा भेटबाक चाही। राजा द्वारा प्रशन कयला पर गोनू झा कहलथिन जे हम ओकर खालसंएक नहि हजार बना लेब। राजा गोनुक बुरबकइकें सहर्ष स्वीकार लेलनि।

महींस मारल गेल। गोनू खाल लेने बाध-बोनमे बौआइत रहलाह। अन्तमे एकटा गाछ पर जा बैसि रहलाह। दिन रातिमे परिवर्तित भेल। निसभेर रातिमे दू टा चोर चोरी क क घुरल अबैत छल। ओ सभ ओहि गाछ तर अपन समानक बंटबारा कर लेल बैसल। एक टा चोरकें कने कम सुझैत छलैक। तं ओ कहलक जे भाइ, ठीक सं बाँट-बखरा करिह, नहि त बज्र खसतौक।

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गोनू झा सभ टा गप्प सुनैत छलाह। एन मौकपर ओहि खालकें चोरबा सभपर फेकलनि। ओ सभ तकरा वास्तवमे बज्र बुझि सब किछु छोड़ी-छाड़ी भागल। गोनू चैनसं नीचा उतरलाह आ सभ वस्तुजात ल घर विदा भ गेलाह। रातुक घटनाक कानोकान खबरि पूरा गाममे पसरि गेल। किछु माउग एकर रहस्य पता लगाब लेल हुनकर कोंटा धयलक।

गोनू झा पत्नीसं झगड़ाक नाटक रचा एहन-एहन बात सभ बजलाह जे दोसरे दिन गमक सभ महींस कसाइयक ठेहापर चढ़ी गेल आ धन-सम्पत्तिक प्रतीक्षा गामक लोक जंगलमे भगवानक प्रतीक्षा करैत रहलाह। कियक तs गोनू झाक अनुसार भगवानहि द्वारा हुनका अतेक धन-सम्पत्ति प्राप्त भेल छलनि। मुदा कतहु किछु नहि भेटलनि। सभ मुँह विधुऔने अपना घर घुर लगलाह तथा गोनुकें देखि नुकाय चाहलनि।

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