Thursday, October 18, 2018

मैथिली किस्सा – गोनू झाक माछ आ नौआ

गोनू झा एकबेर बहुत दिनक बाद अपन जजमनिकासं घुरल आबैत छलाह। बाटमे हाट पर माछक बाजार से माछकेँ नीक जकाँ तौलि दमगरसं खोंचरिमे बान्हि थमहा देलकनि। थोड़वहि कालक बाद देखैत छैथि जे गामक नौआ आबि रहल अछि।

Gonu Jha and Barber - Maithili Samachar

मैथिली किस्सा: गोनू झा एकबेर बहुत दिनक बाद अपन जजमनिकासं घुरल आबैत छलाह। बाटमे हाट देखि ठमाकि गेलाह। माछक बाजार मे माछक अम्बार देखि मोन पनिया गेलनि। बटुआ टोलनि। भरल छलनि। जजमान कयनहुरहनि बेस बिदाइ। कराचुर एक मासक बिदाइ रहनि बटुआमे। चट अपन पसिन्नक रोहु माछ तौलबाक हेतुमलाहकेँ कहलनि। जीबैत माछ छहछह करैत। मलाह परिचित रहनि। माछकेँ नीक जकाँ तौलि दमगरसं खोंचरिमे बान्हि थमहा देलकनि।

गोनू बाबु ओकरा पाइथम्हा गदगद होइत गाम विदा भेलाह। मोन तिरपित रहनि। आजुक भोजनक कल्पना करैत रहलाह। बेर-बेर जजमानकेँ आशीर्वाद दैत रहथिन। अतेक दिनुका बाद गोनूकेँ घुरल देखि, सेहो माछक संग, पत्नी त बुझू जे नाचि उठलथिन। कि थोड़वहि कालक बाद देखैत छैथि जे गामक नौआ आबि रहल अछि। लग आबि प्रणाम कयलकनि मुदा ओकरनजरि रहैक खोंचरि पर। नौआ जखनहि प्रणाम कयलकनि कि गोनू बाबू हालचाल पुछलथिन – कहह, गाम घरक हालचाल!

ओ एहिपर मूँह लटका लेलक। गोनू बाबूकेँ किंचित चिन्ता भेलनि। भ सकैछ, घरमे एकरा किछु भ गेल होइक। ओ आत्मीयताक संग पुछलथिन। नौआ चुप्पे रहल। क्रमशः ओकर मूँह लटकैत जैत रहैक। कतेक कालक आग्रह – अनुरोधक बाद नौआक बकार खुजलैक जकर निचोर रहैक जे एखनहि थोड़ेक काल पहिने गोनू बाबुक पत्नीक देहांत भ गेलनि। चोट्टहि लोक हुनक दाह-संस्कारसं घुरल अछि। गोनू बाबू गाछसं खासलाह। आब कि होयत। हमरा तं दुनियेँ अन्हारे भ गेल। आब ककरा लेल ई देह। ककरा ला इच्छा-आकांक्षा गोनू बाबू किछु नहि बाजि सकलाह।

इहो पढू : मैथिली किस्सा – ‘गोनू झा’ के स्वर्ग से बजाहट

बड़ी काल धरि ठकमुड़ी लागल रहनि। अंततः गहवरित कंठे नौआकैँ माछ दैत कहलथिन जे लैह ई आब तोंही। हम आब कत आ ककरा लेल ल जायब के खायत एहि छुतका मे। गोनू बाबू जतबहि प्रसन्नचित रहथि, ततवहि दुखी होइत घर दिस बढ़ैत गेलाह। डेग नहि उठैत रहनि। मुदा जखन आँगन पहुँचलाह पंडिताइनकेँ देखि तराटक लागि गेलनि। तुंरत बात छनकलनि। जरुर नौआक नंगटेअछि। माछक कारणे हमरा अतेक पैघ अनिशटक गप कहि माछ टानि लेलक। बात आयल-गेल, ख़तम भ गेल। फेर वैह गोनू झा आ वैह नौआ। नौआ बुझलक गोनू बाबू हँसोर लोक तेँ हँसी कयलियनि। गोनू झा
बुझलनि जे नौआ छी। पसारी छी। कोनो बात नहि।

इहो पढू : गोनू झा के माँ कालीक साक्षात दर्शन

किछु दिनक बाद गोनू बाबूकेँ कुठाममे गूड़ भ गेलनि। ओ खाट ध लेलनि। ने उठि होनि आ ने निन्न होनि। गूड़ जखन पाकि गेलनि त नौआकेँ कहा पठाओलनि जे आबि कनी मुहँ बना देत। नौआ गोनू बाबूकेँ ठकने रहनिमुदा ओ किछु नहि कहलथिन। एखन कष्टमे छथि, त हमर कर्त्तव्य अछि जे यथासाध्य सहयोग करियनि। ओ गोनू बाबूक घर पहुँचल गोनू दर्दसं बाप-बाप क रहल रहथि। ओ इशारा सं गूड़क स्थान कहलथिन।

इहो पढू : मैथिली किस्सा – गोनू झाक पुरस्कार

नौआ लोहखर खोलि निधुरिक गूड़क मुहँ बनब चाहलक। गोनू दर्दसं मर्माहत रहितहु संकेत सं पुनः कहलथिनजे खाटक नीचां बिनु पैसने नहि भ सकैत छह। नौआ खाटक तरमे घुसियायल आ चित्त भ लहरनि हाथमे ल तैयार भेल आ खाटक रस्सी काट के ओयमें छेद बनेलक। लेकिन नौआ के गूड़क घाव नै भेटल। उ जोर से कहलक “मालिक गूड़क घाव कहाँ छै?” बस फेर की छल गोनू झा इहा फिराक में छलैथ, गोनू झा तीन दिन से मल रोकने छलैथ, नौआ जखनहि फेर बाजल कि गोनू झा नौआ के मुहे पर पूरा प्रसाद बरसा देलैथ। बेचारा नौआ बाप – बाप करैत ओत सं भागल आ सोझे पोखरिमे जा करकि खसल। अब ओ क की सकै छल। बेचारा नौआ अपन मुँह सब साफ़ क के घर चैल गेल।

गोनू झा के और किस्सा पढ़ैय के लेल क्लिक करू।

मैथिली समाचार से जुड़ल सब नब नब खबर जानै के लेल हमरा फेसबुक गूगल प्लस पर ज्वॉइन करू, आ ट्विटर पर फॉलो करू...
Web Title: मैथिली किस्सा – गोनू झाक माछ आ नौआ

(Read all latest Maithili News, Gonu Jha News Headlines in Maithili and Stay updated with Maithili Samachar)

error: