Tuesday, December 11, 2018

मैथिली किस्सा – “बगिया के गाछ”

मैथिली बाल कहानी- बगिया के गाछ: एगो बच्चाकें बगिया बड्ड नीक लगैत छलैक। से ओ एक बेर ओ एकटा बगिया बाड़ीमे रोपि देलक। ओतए बगियाक गाछ निकलि आएल। माय बेटा ओहि बगिया के गाछ क खूब सेवा करए लगलाह।

बगिया के गाछ, Bagiya Tree Maithili Story (Maithili Samachar)

मैथिली बाल कहानी : एकटा मसोमात छलीह आ’ हुनका एकेटा बेटा छलन्हि। ओ’ छल बड्ड चुस्त-चलाक। एक दिनुका गप अछि। ओ स्त्री जे छलीह, अपना बेटाकें बगिया बना कए देलखिन्ह। ओहि बालक केँ बगिया बड्ड नीक लगैत छलैक। से ओ’ एहि बेर ओ’ एकटा बगिया बाड़ीमे रोपि देलक। ओतए बगिया के गाछ निकलि आएल।

बगिया के गाछ, नञि देखल ने सुनल। माय बेटा ओहि बगियाक गाछक खूब सेवा करए लगलाह। आ कनेक दिनमे एकटा बड़का बगियाक गाछ बनि गेलै। कनेक दिनमे ओहि गाछमें खूब बगिया फड़य लागल। ओ’ बच्चा गाछ पर चढ़ि कए बगिया तोड़ि कए खाइत रहैत छल।

एक दिनुका गप अछि। एकटा डाइन बुढ़िया रस्तासँ जा’ रहल छल। ओकरा मनुक्खक मसुआइ बना कए खायमे बड्ड नीक लगैत रहैक। से ओ’ जे बच्चाकेँ गाछ पर चढ़ल देखलक, तँ ओकर मोन लुसफुस करए लगलैक।

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ओ बुढ़िया मोनसूबा बनबए लागल जे कोना कए ई बच्चा के फुसियाबी आ एकरा घर ल जा कए एकर मसुआइ बना कए खाइ। एक दिन बुढ़िया बच्चाकेँ बगियाक गाछ लग असगर देखि के ओ बच्चाकें लग गेल आ कहलक-

बुढ़िया- “बौआ एकटा बगिया हमरा नहि देब। बड्ड भूख लागल अछि।”

बच्चा बगियाक गाछ पर से ओकर हाथ पर बगिया देबय लागल।

बुढ़िया कहलक- “बौआ हम हाथसँ कोना लेब बगिया हथाइन भ जायत।”

बच्चा बगिया माथ पर राखए लागल।

बुढ़िया कहलक- “हँ हँ माथ पर नहि राखू। मथाइन भ जायत।”

बच्चो छल दस बुधियारक एक बुधियार। खोइछमे बगिया देबए लागल।

“ई की करैत छी बौआ। बगिया खोँछाइन भ जायत, अहाँ झुकि कए बोरामें दए दिअ।”

मुदा बच्चा तँ छल बुझू जे गोनू झाक मूल-गोत्रेक। बच्चा बाजल- “नञि गए बुढ़िया। तों हमरा बोरामें बन्द कए भागि जेमह। माय हमरा ठग सभसँ सहचेत रहबाक हेतु कहने अछि।”

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मुदा बुढ़ियो छल ठगिन बुढ़िया। ठकि फिसिया कए बोली-बाली दए कए ओकरा मना लेलक। बगियाक गाछ से जखने बच्चा झुकल बुढ़िया ओकरा बोरामे कसि कए चलि देलक। बुढ़िया रस्तामें थाकि कए एकटा गाछक छहरिमे बैसि गेलि।

कनेक कालमे बुढ़िया के आँखि लागि गेल। ओ ओतै गाछक छहरिमे सूति रहल। बच्चा मौका देखि कोहुना कए ओहि बोरासँ बाहर बहरा गेल आ भीजल माटि, पाथर आ काँट-कूस बोरामे ध कए ओहिना बान्हि कए पड़ा गेल।

बुढ़िया जखन सूति कए उठल त ओ बोरा कए ल के आगू बढ़ल त ओकरा बोरा भरिगर बुझएलैक। बुढ़िया मोने-मोन प्रसन्न भ गेलि ई सोचि के जे हृष्ट-पुष्ट मसुआइ खएबाक मौका बहुत दिन पर भेटल छैक ओकरा। रस्तामे भीजल माटिसँ पानि खसए लागल तँ ओकरा लगलैक जे बच्चा लगही कए रहल अछि।

बुढ़िया कहलक जे- “माथ पर लहुशंका कए रहल छए बौआ। कोनो बात नहि। गाम पर तोहर मसुआइ बना कए खायब हम।”

कनेक कालक बाद बुढ़िया के काँट गरए लगलैक, बुढ़िया कहलक- “बौआ, बिट्ठू काटि रहल छी। कोनो बात नहि कतेक काल धरि काटब। आय त गाम पर तोहर मसुआइ बना कए खायब हम।”

बुढ़्याक एकटा बेटी छलैक। गाम पर पहुँचि कए बुढ़िया अपन बेटी से कहलक जे- “आइ एकटा मोट-सोट शिकार छौ बोरामें। जल्दीसे एकर मसुआइ बना। लेकिन जखन माय बेटी बोरा खोललक तँ निकलल माटि, काँट आ पाथर। बुढ़िया कहलक “कोनो बात नहि, ऐ बेर भाईग गेलौ दोसर बेर।”

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किछ दिन के बाद बुढ़िया भेष बदलि के फेरसँ पहुँचल बगियाक गाछ तर। एहि बेर बच्चा ओकरा नञि चीन्हि सकल। मुदा जखन ओ झुकि कए बगिया बोरामे देबाक गप कहलक तँ बच्चाकेँ आशंका भेलैक।

बच्चा बाजल- “गए बुढ़िया, तोँही छँ ठगिन बुढ़िया। ओए दिन तुहीं हमरा ठैग के बोरा में बंद क ल गेल छेलें। हमरा पूरा याद या तोँही छँ ऊ ठगिन बुढ़िया।”

मुदा बुढ़िया जखन शप्पथ खएलक तँ ओ बच्चा झुकि कए बगिया बोरामे देबए लागल। आ फेर भेल वैह बात। बगियाक गाछ से जखने बच्चा झुकल बुढ़िया ओकरा बोरामे कसि कए चलि देलक। एहि बेर बुढ़िया कतहु ठाढ़ नहि भेल।

एहि बेर बुढ़िया सोझे घर पहुँचल आ बेटी लग बोरा राखि के कहलक आइ एकटा मोट-सोट शिकार छौ बोरामें। जल्दीसे एकर मसुआइ बना। इ सब कैह के बुढ़िया नहाए-सोनाए ले चलि गेल।

बुढ़ियाक बेटी एहि बेर जखन बोरा खोललक तँ एकटा नमगर केश बला बच्चाकेँ देखलक। बच्चाकेँ बोरामें से निकाईल के ओ पुछलक- “तोहर केश एतै नमगर छौ और हमर केश नमगर नहि अछि से किएक।”

बच्चा तँ छल दस होसियरक एक होसियार तैँ। बच्चा झटसं बुढ़ियाक बेटी से कहलक- “अहाँक माय अहाँक माथ ऊखड़िमे दए समाठसँ नहि कुटने होयतीह। तैँ अहाँक केश नमगर नहि अछि।”

बच्चाकेँ बात सुनिके बुढ़ियाक बेटी कहलक हमरो अपन केश नमगर करै के अछि। बुढ़ियाक बेटी झटसं ऊखड़ि आ समाठसँ ल अनलक। बुढ़ियाक बेटी अपन केश बढ़ेबाक लेल अपन माथ ऊखड़िमे देलन्हि छल कि ओ बच्चा ओकरा समाठसँ ऊखड़िमे कूटै लागल। आ ओकरा कुटैत-कुटैत मारि देलक।

ओय के बाद बच्चा ओकरा मारि ओकर मासु बनेलक। आ बुढ़िया लेल मासु परसि के रैख देलक। बुढ़िया जखन पोख्रिसँ नहाए-सोनाए कए आयल तँ देखलक मासु परसि के राखल छल। ओ खेनाइ पर बैस गेल।

जखने ओ खेनाइ पर बैसलि तँ लगमे एकटा बिलाड़ि छल से बाजि उठल- “म्याँऊ, अपन धीया अपने खाँऊ। म्याँऊ। अपन धीया अपने खाँऊ।”

बिलाड़ि के बात सुनी के बुढ़िया अपन बेटी क आवाज लगाक कहलक- “बेटी एकरा मासु नहि देलहुँ की। तँ बाजि रहल अछि।”

ओ बच्चा बिलाड़िक आँगा सेहो मासु राखि देलक मुदा बिलाड़ि मासु नहि खएलक। इ देख के आब बुढ़ियाक माथ घुमल। ओ बेटीकेँ सोर कएलक तँ ओ बच्चा समाठ ल कए आयल आ बुढ़िया के समाठसँ मारि देलक। ओय के बाद बच्चा अपन गाम पर चलि गेल।

गाम पर गेला के बाद बच्चा सब समाद अपन माय से कहलक। आ फेरसँ बच्चा बगियाक गाछ पर चढ़ि बगिया खए लागल।

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Web Title: मैथिली किस्सा – “बगिया के गाछ”

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