Tuesday, August 14, 2018

मैथिली किस्सा – गोनू झा आ सेठजी

एक समय गोनू झा गरीबीक दिन काटि रहल छलाह। एकटा सेठसं ओ सय टाका कर्ज लेलनि। ओकर सुदि बढ़ैत गेल, जे हजार धरि ठेकि गेल। एक दिन सेठजीकें पता लगलनि जे गोनू झा के पुत्र के विवाह भ रहल छैन।

Gonu Jha and Sethji Maithili Story

मैथिली किस्सा : एक समय गोनू झा गरीबीक दिन काटि रहल छलाह। एकटा सेठसं ओ सय टाका कर्ज लेलनि। ओकर सुदि बढ़ैत गेल, जे हजार धरि ठेकि गेल। एक दिन सेठजीकें पता लगलनि जे गोनू झाक पुत्र के विवाह भ रहल छैन। ओ सोचलनि जे ऐन मौका पर ओत पहुँचल जाय। अपन इज्जति बचयबाक लेल ओ कर्ज अवश्य द देताह।

गोनू झा पाहून परकक सेवा – सत्कारमे लागल छलाह। सेठजीकें देखि़ते हुनकर प्राण सुखा गेलनि। मुदा अपन बुधिसं काज लेलनि। ओ खूब आदर सत्कारसं हुनका बैसोलनि तथा काफी विन्यासपुर्वक भोजन करओलनि। सेठजी हुनकर एहि व्यवहारसं अति प्रसन्न भेलाह। गोनू झा हुनका भोजनोपरान्त एकांतमें ल जाक अनुनय कयलनि -सेठ जी, हमरा पूस मास धरिक समय दिअ। हम ओहि मासक पूर्णिमाके सुदि समेत अपनेक मुरि सधा देब।

गोनू झाक आवभगतसं प्रसन्न सेठजी हुनकर बात मानि गेलाह। धीरे धीरे कातिक बीतल। आगहन सेहो समाप्त भेल। पुसक पूर्णिमा सेहो लगचिया गेल। ठीक पूर्णिमाकें सेठजी गोनू झाक दलान पर छलाह। मुदा गोनू झा त पूर्वहिसं तैयार छलाह। सेठजीक अयबाक खबरि लागिते ओ एकटा रस्सी लेने आगनसं बहरयलाह आ लगक गाछ पर चढ़ी गेलाह। रस्सीक एक छोर गाछमे बान्हि दोसरसं अपन गर्दनमे ससरफानी लगा लेलनि।

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इ सभ देखि सेठजी विचलित भ उठलाह – ई की करै छी गोनू बाबू? गोनू झा बजलाह – “सेठ जी, अहाँ हमर जीवनकें नर्क बनाक राखि देलहूँ अछि। हमर इज्जति धरि माटिमे मिला देलहूँ। एहन जिनगीसं मृत्यु नीक। आइ हम अपन जीवनकें अन्त क लेब। आब आहांकें ब्रह्महत्या लागत आ हमरा सदाक लेल कर्जसं मुक्ति भेटी जायत।”

गोनू झाकें बुझबयाक उधेश्यसं सेठजी हुनका कहलथिन जे – “एहि लेल ई बात नीक नहि। अहाँ नीचा उतरि आउ आ एखन जतवे होइए, ततवे द दिअ।” मुदा गोनू झा अपन जिद पर अड़ल छलाह। गोनू झा कहलथिन – “आब त अहाँकें ब्रह्महत्याक पाप लगबे करत, ओ ताहि कारण राजा अहाँकें फाँसी पर लटका देताह।”

सेठजी हुनका कहलथिन – “अहाँ उतरि जाउ गोनू बाबू, हम अहाँक आधा सुदि माफ़ क देब।” तै पर गोनू झा कहलथिन – “अहाँ पूरा सुदि माफ क देब, हम तैयो नहि उतरब।” सेठ जी कल जोड़ी लेलनि। मुदा गोनू ताहू पर नहि घमलथिन। आ अपन गरदनिमे बान्हल रस्सिकें कमय लगलाह। सेठ जी घबड़ा गेलाह आ कहलथिन – “अहाँके हम पुरोसं कम क देब। जतबे होअय ततवे दिअ। मुदा गाछ्परसं उतरि जाउ। हमरा संकटमे नहि दिअ।”

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मुदा गोनू झा अपन गरदनि़क रस्सी कसिते जा रहल छलाह बजलाह – ‘सुनै जाइ जाउ ओ गौआँ सभ, ऐ सेठसं आजिज भ हम आत्महत्या क रहल छी। अहाँ सभ कने राजाकेँ ई खबरि पहुँचा दिअनु।” हुनकर एहि क्रियापर गामक लोक सभ जमा होब लागल। सेठ जी अनुनय करैत बजलाह – “गोनू बाबू अहाँ गाछपरसं उतरि जाउ। हम मूरमे सं सेहो आधा माफ क देब। अहाँ मात्र पचास टाका द दिअ।”

गोनू झा बजलाह – “हमरा लग त एकटा दोकड़ा नहि अछि।” तहन सेठ जी बजलाह – “नहि अछि त कोनो बात नहि। अहाँकें हम एक मासक समय आओर दै छी। तै पर गोनू झा बजलाह – “सुनी लै जाउ ओ गौआँ सभ! ई हमरा एक मास धरि तंग नहि करताह। सेठ जी बजलाह – “गोनू बाबू हम एक माससं पूर्व अहाँ ओतय टपबो नहि करब।” तहन गोनू झा बजलाह – “अच्छा त हम उतरि जाइ छी।

एक मासक बाद ठीक ओही दिन गोनू झा आंगनमे एकटा यगकुंड बनओलनि। कुंडक आगू कागजक पुतरा रखलनि आ ओकर भीतर आगि। आ ओकर भीतर आगि। आ ओकर ऊपरमे एकटा बासनमे कडू तेल बड़क लेल राखि देलनि। पलथी मारि कातमे एकटा कमंडल राखि भजन गाबय लगलाह। तखने सेठ जी पहुँचलाह। हुनका पूजा करैत देखि चुपचाप बैसी रहलाह। किछु काल धरि त गोनू झाक ध्यान टूटबाक प्रतीक्षा कयलनि। भोरसं सांझ भ गेल मुदा हुनकर ध्यान नहि टूटल। अंतमे ओ हुनक देहकें झिकझोरि देलथिन।

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गोनू झाक ध्यान भंग होइते ओ क्रोधसं लाल भ उठलाह – “सेठजी तों हमरा ध्यान भंग क भगवानके कुपित कयलह अछि। तोहर सर्वनाश निकट छह। ठहरह, पहिने ऐ पुतराकें भस्म क अपन मंत्रक जाँच क ली, तखन तोहरी भस्म करैत छी।” ई कहैत गोनू झा कमंडल उठओलनि।

ओहिमेसं एक चुरुक जल बहर कयलनि। तत्पशचात क्रोधक संग ओहि कागजक पुतरा पर जलक छीटा मारलनि। छीटा कड़कैत तेलमे पड़ल आ आगि तुरत दहकि उठल। पल भरिमे कागजक पुतरा जरि क छाउर भ गेल। गोनू झा जखन सेठ जी दिस घुसलाह आ कहलथिन – “देखि लेलह हमर सिद्धि! आब हम तोरा भस्म करैत छी।” एही देख सेठ जी ओतयसं पड़यलाह। ओय के बाद फेर कहियो खोज कर नहि अयलाह।

गोनू झा के किस्से: गोनू झा एकटा सेठसं सय टाका कर्ज लेलैथ

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Web Title: मैथिली किस्सा – गोनू झा आ सेठजी

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